Bareilly: सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा, प्रयागराज की घटना और यूजीसी कानून के विरोध में छोड़ा पद
26 जनवरी को प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप, PCS अफसर का सरकार पर गंभीर आरोप
बरेली। सिटी मजिस्ट्रेट और 2016 बैच के PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा देकर पूरे प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में खलबली मचा दी। उन्होंने यह इस्तीफा प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ हुई कथित पुलिस मारपीट तथा यूजीसी के नए कानून के विरोध में दिया है। खास बात यह रही कि उन्होंने यह कदम गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) जैसे राष्ट्रीय पर्व के दिन उठाया।
शंकराचार्य और शिष्यों के साथ हुई घटना से आहत होने का दावा
अलंकार अग्निहोत्री ने राज्यपाल और निर्वाचन आयोग को भेजे गए अपने सात पन्नों के इस्तीफे में लिखा है कि प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या स्नान के समय ज्योतिष पीठ ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों के साथ स्थानीय पुलिस प्रशासन ने कथित रूप से मारपीट की।
उन्होंने आरोप लगाया कि वृद्ध आचार्यों के साथ दुर्व्यवहार किया गया, एक बटुक ब्राह्मण को जमीन पर गिराकर उसकी शिखा पकड़कर घसीटा गया, जो ब्राह्मणों और साधु-संतों की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
इस्तीफे में उन्होंने स्पष्ट किया कि वे स्वयं ब्राह्मण समाज से आते हैं और इस घटना ने उन्हें गहराई से आहत किया है।
प्रशासन और सरकार पर ब्राह्मण विरोधी मानसिकता का आरोप
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पत्र में लिखा कि प्रयागराज की घटना यह दर्शाती है कि स्थानीय प्रशासन और वर्तमान राज्य सरकार ब्राह्मण विरोधी विचारधारा के तहत काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं एक सामान्य ब्राह्मण की आत्मा को झकझोर देती हैं और साधु-संतों की अस्मिता के साथ खुला खिलवाड़ है।
यूजीसी के नए कानून को बताया ‘काला कानून’
सिटी मजिस्ट्रेट ने यूजीसी के नए नियमों का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन नियमों के तहत सामान्य वर्ग के छात्रों को स्वघोषित अपराधी मान लिया गया है। उनका कहना है कि यह कानून छात्रों के करियर और व्यक्तिगत जीवन को खतरे में डाल सकता है और इससे समाज में विषमता और शोषण बढ़ेगा।
ब्राह्मण सांसदों और विधायकों पर भी साधा निशाना
अलंकार अग्निहोत्री ने ब्राह्मण समाज से आने वाले सांसदों और विधायकों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये जनप्रतिनिधि एक कॉर्पोरेट कंपनी के कर्मचारी की तरह काम कर रहे हैं, जहां सीईओ के बिना बोले हाथ नहीं हिलते। उन्होंने ब्राह्मण सांसदों और विधायकों से पद से इस्तीफा देकर समाज के साथ खड़े होने की अपील की।
सोशल मीडिया पर पोस्टर के साथ तस्वीर वायरल
इस्तीफे के दिन अलंकार अग्निहोत्री की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसमें वे हाथ में पोस्टर लिए खड़े दिखाई दे रहे हैं।
पोस्टर पर लिखा था—
“#UGC_Roll_Back… काला कानून वापस लो
शंकराचार्य और संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान”
व्हाट्सएप ग्रुप से सबसे पहले फैली इस्तीफे की खबर
अलंकार अग्निहोत्री ने बरेली में तैनाती के बाद “पुनरुत्थान बरेली परिवार” नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया था, जिसमें करीब 529 सदस्य जुड़े हैं।
इस्तीफे की खबर सबसे पहले इसी ग्रुप में सामने आई। ग्रुप में कुछ लोगों ने उनके फैसले को हिंदुत्व के पक्ष में साहसिक कदम बताया, जबकि कुछ ने कहा कि उन्हें संवैधानिक पद पर बने रहकर संघर्ष करना चाहिए था।
इस्तीफे में सरकार पर तीखा हमला
इस्तीफे के अंत में अलंकार अग्निहोत्री ने बेहद कड़े शब्दों में लिखा कि देश में अब न जनतंत्र बचा है और न गणतंत्र, बल्कि केवल “भ्रमतंत्र” रह गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में अब देशी सरकार नहीं, विदेशी जनता पार्टी की सरकार चल रही है।
प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
एक वरिष्ठ PCS अधिकारी के इस तरह सार्वजनिक विरोध और इस्तीफे ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजरें सरकार और प्रशासन की आगे की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
प्रशासनिक पृष्ठभूमि और कार्यकाल
मूल निवासी: कानपुर नगर
जन्म: 19 मई 1982
डिप्टी कलेक्टर चयन: वर्ष 2019
पूर्व तैनाती: उन्नाव, बलरामपुर, एटा, लखनऊ
सिटी मजिस्ट्रेट, बरेली: 27 मई 2025 से


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