UPSRTC: जीरो टॉलरेंस नीति हुई फेल, बरेली परिक्षेत्र में टेंडर से बिलिंग तक भ्रष्टाचार का बोलबाला
बरेली। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बरेली परिक्षेत्र में भ्रष्टाचार और मनमानी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। टेंडर प्रक्रिया से लेकर बिल पास कराने तक हर स्तर पर फर्जीवाड़े की परतें खुल रही हैं। स्थिति यह है कि दोषी पाई गई फर्मों पर कार्रवाई तो दूर उन्हें दोबारा बिना ठेके के काम देकर पुरस्कृत किया जा रहा है, जिससे विभाग की पारदर्शिता और शासन की जीरो टॉलरेंस नीति पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार वर्ष 2023 के टेंडर में ममता इंटरप्राइजेज को स्वीकृति मिली थी, जबकि शिवा भसीन फर्म का वित्तीय प्रस्ताव निरस्त कर दिया गया था। इसके बावजूद बदायूं और पीलीभीत डिपो में कार्य उसी अस्वीकृत फर्म से कराया गया। विभागीय अधिकारियों की इस कथित मेहरबानी पर तभी से सवाल उठने लगे थे। जब एक बड़ा सवाल यह भी है टेंडर प्रक्रिया में शिवा भसीन नामक फ़र्म भाग लेती है और कार्यादेश भसीन इंटरप्राइज़ेज़ के नाम जारी होता है।
वर्ष 2024 आते-आते अनियमितताओं का दायरा और बढ़ गया। आरोप है कि ममता इंटरप्राइजेज और भसीन इंटरप्राइजेज दोनों ने बिना बसों की वास्तविक मरम्मत किए फर्जी बिलिंग के माध्यम से लाखों रुपये की बंदरबांट की। मामला मीडिया की सुर्खियां बनते ही विभाग में हड़कंप मच गया और नवंबर 2024 में दोनों फर्मों के टेंडर निरस्त कर दिए गए। जांच बैठी और भ्रष्टाचार के आरोप में सेवा प्रबंधक धनजीराम को निलंबित भी किया गया।
लेकिन हैरत तो तब हुई जब दिसंबर 2024 में नए टेंडर के दौरान पुनः दोषी फर्म शिवा भसीन को पीलीभीत और क्षेत्रीय कार्यशाला का ठेका दे दिया गया। इतना बड़ा विवाद होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहे।
इसी बीच सैनिक इंटरप्राइजेज को बरेली और रोहिलखंड डिपो का ठेका मिला, लेकिन रेट नॉन-वर्केबल होने के कारण फर्म ने बरेली में काम शुरू ही नहीं किया।
यही मौका पाकर, आरोप है कि बिना किसी नए टेंडर और बिना वर्क ऑर्डर जारी किए, दोनों डिपो का काम फिर से भसीन इंटरप्राइजेज को सौंप दिया गया, और बिलिंग/भुगतान का सिलसिला लगातार जारी है। सूत्रों का यह भी दावा है कि क्षेत्रीय प्रबंधक और सेवा प्रबंधक समेत कुछ अधिकारी, कथित सुविधा शुल्क के बदले इस फर्म को संरक्षण दे रहे हैं, वर्क ऑर्डर, फील्ड वेरिफिकेशन और वास्तविक मरम्मत की जांच की परवाह किए बिना भुगतान पास किया जा रहा है।
दूसरी ओर, प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय ठेकेदारों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम में टेंडर प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। बार-बार वही पुराने ठेकेदारों को काम दिया जा रहा है जबकि नई फर्मों को मौका ही नहीं मिलता।
शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के विपरीत प्रदेश के कई डिपो में वर्षों से बिना प्रतिस्पर्धा के वही फर्में लगातार काम कर रही हैं, और हर बार टेंडर नवीनीकरण कथित सुविधा शुल्क लेकर किया जा रहा है।
बरेली परिक्षेत्र में लगातार तीन बार टेंडर प्रक्रिया अपनाने के बावजूद उसी फ़र्म को फायदा पहुँचाया गया जिस पर फर्जी बिलिंग और अनियमितताओं के गंभीर दोष जाँच में साबित हुए हैं।
नई फर्मों को अवसर नहीं, वर्क ऑर्डर के बिना भुगतान जारी और अधिकारी सवालों से बचते हुए परिवहन निगम की कार्यप्रणाली पर अब जनता और ठेकेदार दोनों सवाल खड़े कर रहे हैं।
पूरे मामले में अभी तक परिवहन निगम की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मुख्यालय में तैनात उच्च अधिकारियों अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बचते नज़र आ रहे हैं।
लेकिन वर्क ऑर्डर के बिना काम, दोषी फर्मों की दोबारा ताजपोशी, बिलिंग का लगातार जारी रहना स्पष्ट करता है कि कहीं न कहीं ऊपरी संरक्षण मौजूद है।
जागेश्वर न्यूज नेटवर्क इस मुद्दे की आगे भी परत-दर-परत पड़ताल जारी रखेगा।
जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष या आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

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