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आधी रात जंगल में थमी जनरथ — 7 महिलाएँ दहशत में, बच्चे रो पड़े… 4 घंटे तक सन्नाटे में फंसे यात्री

आधी रात जंगल में थमी जनरथ — 7 महिलाएँ दहशत में, बच्चे रो पड़े… 4 घंटे तक सन्नाटे में फंसे यात्री


मरम्मत घोटाले और फर्जी बिलों की पोल फिर खुली — निलंबन के बाद भी सिस्टम में सुधार नहीं

बरेली। प्रयागराज जाने वाली जनरथ एसी बस बुधवार देर रात अचानक जंगल के सुनसान इलाके में खराब हो गई, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल बन गया। रात लगभग एक बजे बरेली से फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर होते हुए प्रयागराज जा रही यूपी 32 एमएन 9892 नंबर की बस का इंजन अचानक बंद हो गया। घटना के समय बस में सात महिलाएं भी मौजूद थीं। चारों ओर अंधेरा और सुनसान माहौल होने की वजह से महिला यात्रियों में काफी भय का वातावरण बना रहा। करीब चार घंटे तक बस सड़क किनारे खड़ी रही, इसके बाद दूसरे वाहन की व्यवस्था कर यात्रियों को आगे भेजा गया।

यात्रियों के मुताबिक अचानक इंजन बंद होने के बाद ड्राइवर ने कई बार प्रयास किए, लेकिन बस स्टार्ट नहीं हुई। कई यात्रियों के मोबाइल नेटवर्क भी बंद होने लगे। इस दौरान बच्चे रोने लगे और महिला यात्री असुरक्षा के चलते चिंता में रहीं। घटनास्थल जंगल क्षेत्र होने के कारण कोई भी वाहन वहां से लंबे समय तक नहीं गुजरा।

मरम्मत में फर्जीवाड़े की चर्चा फिर तेज

रोडवेज बसों की मरम्मत में अनियमितताओं का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। कर्मचारियों का कहना है कि बसों के इंजन में पुराने और घटिया मोबिल ऑयल का उपयोग होने के साथ मरम्मत किए बिना भी बिल पास किए जा रहे हैं। आरोप है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है। इसी गड़बड़ियों के चलते कुछ महीने पहले सेवा प्रबंधक धनजीराम को निलंबित किया गया था। हालांकि बसों के मरम्मत बिल पास करने में शामिल डिपो के सीनियर फोरमैन और अन्य जिम्मेदारों के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। शासन स्तर की जांच में तीन एआरएम और चार लेखाकारों के नाम भी सामने आए थे, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई।

जांच के बाद ही भेजी थी बस: फोरमैन

रुहेलखंड डिपो के सीनियर फोरमैन प्रेमबाबू गुप्ता का कहना है कि बस की पूरी जांच के बाद ही उसे मार्ग पर भेजा गया था। इंजन में तकनीकी खराबी आने से ब्रेकडाउन हुआ। उनके मुताबिक वर्कशॉप में प्रशिक्षित मैकेनिकों की कमी है और मरम्मत का अधिकांश कार्य निजी फर्म के माध्यम से कराया जा रहा है।

रात में बस का जंगल में खड़ा होना गंभीर: प्रबंधन

क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी ने कहा कि रात के समय जंगल में बस का खराब होना गंभीर मामला है। संबंधित कर्मियों से जवाब तलब किया जा रहा है और पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी गई है।

अकुशल चालकों को भी दे दी जाती नई बसें

बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चालक तैनाती भी सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार कई चालक दुर्घटनाओं के बावजूद फिर नई बसों पर तैनात कर दिए जाते हैं। मंगलवार को फरीदपुर के पास पलटी रोडवेज बस को चला रहा चालक इससे पहले दो बसों को दुर्घटनाग्रस्त कर चुका है। यात्रियों का कहना है कि अनुशासनहीन और अनुभवहीन चालकों पर अफसरों की मेहरबानी बनी रहने से हादसे बढ़ रहे हैं और नई बसें बार-बार खराब हो रही हैं।

निजी मरम्मत फर्मों से गठजोड़ का आरोप

रोडवेज की बसों की मरम्मत को लेकर अंदरूनी सांठगांठ के गंभीर आरोप सामने आए हैं। कर्मचारियों के अनुसार

 • चुनिंदा निजी फर्मों को ही मरम्मत के ठेके दिए जाते हैं

 • मरम्मत रिपोर्ट कागज़ों में पूरी दिखाई जाती है, लेकिन बसों में वास्तविक काम नहीं होता

 • भुगतान लाखों में होता है, लेकिन गुणवत्ता की कोई जांच नहीं की जाती

सूत्रों के मुताबिक इसी गठजोड़ की वजह से निलंबन और जांच के बाद भी सुधार नहीं हो पा रहा है, और खराब बसें सड़कों पर लगातार दौड़ती जा रही हैं।

यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए

जंगल में रात के अंधेरे में फंसी बस की यह घटना न केवल तकनीकी खराबी, बल्कि रोडवेज की मरम्मत प्रणाली और ड्राइवर तैनाती पर भी बड़े सवाल खड़े करती है। यात्रियों का कहना है कि अगर विभाग समय पर सख्त कार्रवाई नहीं करता, तो यात्रियों की सुरक्षा लगातार खतरे में बनी रहेगी।

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