BEDI INTERNATIONAL SCHOOL: न्याय की आस में दर-दर भटक रहा पिता, DIOS से नहीं मिला न्याय तो बाल संरक्षण आयोग के दरवाज़े पर पहुंचा पीड़ित
आजाद नगर निवासी पीड़ित पिता सौरभ गुप्ता के मुताबिक उन्होंने 4 नवंबर 2025 को डीआईओएस कार्यालय में बेदी इंटरनेशनल स्कूल के विरुद्ध शिकायती पत्र दिया था। लेकिन शिकायत पर आख्या मांगने के लिए दस दिन लग गए, जबकि मामले की गंभीरता बच्चे के भविष्य से जुड़ी हुई थी। बड़ी मशक्कत के बाद 13 नवंबर को आख्या मांगे जाने का पत्र जारी हुआ, पर हैरानी की बात यह रही कि उस पत्र की प्रति पीड़ित पिता को 20 नवंबर को दी गई, अर्थात पूरे 8 दिन बाद।
पीड़ित पिता का आरोप है कि विलंब जानबूझकर किया गया ताकि स्कूल प्रबंधन को अपनी गलती सुधारने का मौका मिल सके, जबकि इसी मानवीय भूल ने छात्र का शैक्षिक वर्ष बर्बाद कर दिया। पीड़ित पिता का कहना है कि इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया कि बेदी इंटरनेशनल स्कूल को शिक्षा विभाग का संरक्षण प्राप्त है। जिसके चलते जांच और आख्या के खेल में शिक्षा विभाग स्कूल को बचाने में जुटा है। जबकि फर्जी प्रमाण या गलत डेटा अपलोड करना बेहद गंभीर प्रकरण है।
सूत्रों की माने तो इस जांच और आख्या के खेल में स्कूल ने विभाग को आर्थिक लाभ दिया है।
स्कूल प्रबंधन ने उल्टा पिता पर ही आरोप लगाए
पीड़ित पिता के अनुसार, स्कूल संचालक अमनदीप बेदी ने गलती स्वीकारने के बजाय उन्हीं पर आरोप लगा दिया कि उन्होंने जानकारी बहुत देर से दी। जबकि सच्चाई यह है कि पिता को तब जानकारी मिली जब उन्होंने बेटे का प्रवेश दूसरे विद्यालय में कराने का प्रयास किया।
इसके बाद, स्कूल प्रबंधन द्वारा पिता को लाखों रुपये का फीस बकायेदार बताकर समाज में बदनाम करने और नीचा दिखाने की भी कोशिश की गई, ताकि आरोपों से ध्यान हटाया जा सके।
कैसे हुआ बच्चे के भविष्य के साथ खिलवाड़
• छात्र देव गुप्ता का एडमिशन 13 अप्रैल 2017 को वेदी इंटरनेशनल स्कूल में कराया गया
• सत्र 2025–26 में इंटरमीडिएट परीक्षा में कम्पार्टमेंट आया
• दोबारा कम्पार्टमेंट परीक्षा देने पर असफल हो गया
• परंतु यू–डाइस पोर्टल पर परिणाम ‘पास’ दर्ज कर दिया गया, जबकि सीबीएसई मार्कशीट में ‘फेल’
• परिणाम के विरोधाभास के कारण किसी भी विद्यालय ने एडमिशन नहीं दिया
• बच्चे का पूरा शैक्षिक वर्ष बर्बाद
पीड़ित पिता के अनुसार जब वह समाधान के लिए स्कूल पहुँचे तो प्रबंधक, प्रधानाचार्य व स्टाफ ने कहा हम इसमें कुछ नहीं कर सकते। आपने पहले नहीं बताया।
दूसरे बच्चे का भी रिकॉर्ड गायब
सौरभ गुप्ता का दूसरा बेटा वेद गुप्ता (कक्षा 11वीं) भी उसी स्कूल में पढ़ रहा है और उसका भी कोई रिकॉर्ड यू–डाइस पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है। यह अपने आप में संकेत है कि मामला एक सामान्य गलती नहीं बल्कि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही है।
पीड़ित पिता के अनुसार स्कूल प्रबंधक अमनदीप बेदी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, जहाँ शिकायत करनी है कर लो, मेरे स्कूल का कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे।
इस कथन ने पीड़ित परिवार के मनोबल को और तोड़ दिया। पूरे परिवार पर मानसिक तनाव, भय और आत्मसम्मान पर चोट की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
आयोग से लगाई न्याय की गुहार
लंबे संघर्ष के बाद जब स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं मिला तो पीड़ित पिता ने बाल संरक्षण आयोग में शिकायत दर्ज कराई है। पिता का कहना है ऐसे स्कूल की मान्यता तुरंत रद्द होनी चाहिए। यह सिर्फ व्यापार चल रहा है, शिक्षा नहीं।
बच्चों के भविष्य से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।
डीआईओएस कार्यालय से न्याय ना मिलते देख पीड़ित पिता ने सीबीएसई से माँग की है कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले ऐसे स्कूल की मान्यता तत्काल रद्द की जाए।
बच्चे की मनोदशा पर गहरा असर
परिवार के अनुसार लापरवाही की इस घटना से छात्र का आत्मविश्वास टूट चुका है, वह गंभीर तनाव में है और पढ़ाई से पूरी तरह निराश हो गया है।

एक टिप्पणी भेजें