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फर्जी मार्कशीट कांड: छात्रों ने की शेर अली जाफरी की संपत्ति जब्त करने की मांग, किसान एकता संघ ने आरोपी गैंगस्टर को बनाया पदाधिकारी

फर्जी मार्कशीट कांड: छात्रों ने की शेर अली जाफरी की संपत्ति जब्त करने की मांग, किसान एकता संघ ने आरोपी गैंगस्टर को बनाया पदाधिकारी


बरेली। डी-फार्मा की फर्जी मार्कशीट प्रकरण में कार्रवाई तेज होने के बीच पीड़ित छात्रों ने अब अपनी जमा फीस वापस दिलाने की मांग उठाई है। डी-फार्मा छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचा और एसीएम को ज्ञापन सौंपा। छात्रों की मांग है कि खुसरो कॉलेज के एम.डी. शेर अली जाफरी की चिन्हित संपत्तियों को ज़ब्त कर उनसे वसूल की गई फीस की धनराशि वापस कराई जाए।

"फर्जी मार्कशीट पकड़े जाने के बाद भी कॉलेज ने धमकाया"- छात्र

छात्र रामजीत यादव और मोहम्मद इमरान ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020 में खुसरो कॉलेज में दो वर्षीय डी-फार्मा कोर्स में प्रवेश लिया था और सत्र पूरा होने के बाद उन्हें कॉलेज द्वारा मार्कशीट दी गई। लेकिन जब वे लखनऊ पीसीआई (फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया) में रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचे, तो पता चला कि दी गई मार्कशीट पूरी तरह फर्जी है।

छात्रों का आरोप है कि इस बारे में जब कॉलेज के एम.डी. शेर अली जाफरी से बात की गई, तो उन्होंने शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी।

जांच में फर्जीवाड़ा साबित, छह आरोपी भेजे गए थे जेल

छात्रों की शिकायत पर एसएसपी बरेली ने तुरंत जांच कराई, जिसमें मार्कशीट फर्जी पाए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने कॉलेज एम.डी. शेर अली जाफरी, उनके बेटे फिरोज अली जाफरी, तथा सहयोगियों तारिक, जाकिर, विश्वनाथ शर्मा और विजय शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

पुलिस और प्रशासन द्वारा आरोपियों की कई संपत्तियों को चिन्हित किया जा चुका है, लेकिन छात्रों का कहना है कि अभी तक संपत्ति ज़ब्त करने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। छात्रों ने मांग की कि कार्रवाई तेज कर उनकी फीस की रकम वापस कराई जाए। शिकायतकर्ताओं में मोहम्मद इमरान, धर्मेंद्र मौर्य, विनोद कुमार वर्मा, फिरोज खान, जशमीत बाजवा, दीपक कुमार, रामजीत यादव, जफर हुसैन, दीपक गंगवार और महेश राठौर शामिल थे।


गैंगस्टर शेर अली जाफरी को किसान एकता संघ में बड़ी जिम्मेदारी, उठे सवाल

फर्जी डिग्री मामले में आरोपी और गैंगस्टर घोषित शेर अली जाफरी को किसान एकता संघ में “किसान संरक्षक” जैसे महत्वपूर्ण पद पर शामिल किए जाने से शहर में नई बहस छिड़ गई है। किसान एकता संघ के इस फैसले ने कई किसान नेताओं और सामाजिक संगठनों को हैरान कर दिया है।

“किसानों के बच्चों से धोखा करने वाले व्यक्ति को पद क्यों?”- किसान नेता

सूत्रों के अनुसार, शेर अली जाफरी ने ख़ुसरो कॉलेज के नाम पर किसानों के बच्चों को फर्जी डिग्रियां देकर करोड़ों रुपये ठगे थे। पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद उन पर गैंगस्टर एक्ट लगाया गया और उनकी संपत्तियों की जांच शुरू की गई।

अब किसान एकता संघ द्वारा उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। कई किसान संगठनों ने इसे “किसानों के साथ विश्वासघात” बताया है।

क्या है अंदरूनी खेल?

संघ के अंदर की चर्चा है कि संगठन के कुछ पदाधिकारियों ने कथित तौर पर “मोटा चढ़ावा” लेकर यह नियुक्ति की है। हालांकि आधिकारिक बयान नहीं आया है। संघ के कुछ सूत्र इसे “रणनीतिक मजबूरी” और “सुधार का अवसर देने” का तर्क बता रहे हैं।

प्रशासन भी सतर्क

बरेली पुलिस इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। जाफरी की लंबित संपत्ति कुर्की की कार्रवाई में देरी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि कहीं किसान संगठन और गैंगस्टर के बीच कोई “गुप्त समझौता” तो नहीं हो गया।

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