Bareilly: पूर्ति विभाग में भ्रष्टाचार का सर्फ-साबुन मॉडल- गरीबों को ठगा, अफसर हुए मालामाल
बरेली। उचित दर की दुकानों की आय बढ़ाने के नाम पर पूर्ति विभाग ने ऐसा खेल रचा कि विभागीय अफसरों की जेबें भरने का जरिया बन गया। शासन ने 24 मई 2023 को एक आदेश जारी कर कोटेदारों की आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से आदेश जारी किया था, जिसमें उन्हें दुकानों पर अतिरिक्त वस्तुएं बेचने की अनुमति दी गई थी। लेकिन बरेली जिले में इस आदेश की आड़ में विभागीय अफसरों ने अपने सिस्टम के जरिए खुलेआम वसूली का जाल बिछा दिया।
सूत्रों के अनुसार, बीते महीने जिले की अधिकतर उचित दर की दुकानों पर सर्फ और साबुन अनिवार्य रूप से बेचने का आदेश दिया गया। दुकानदारों को 60 रुपये में मिलने वाला सर्फ और साबुन 100 रुपये में ग्राहकों को बेचना पड़ा। इस 100 रुपये में से 25 रुपये जिला पूर्ति अधिकारी और उनके चहेते एआरओ के हिस्से में जाते रहे, जबकि 15 रुपये दुकानदार को दिया गया। यानी जनता से वसूले गए हर सौ रुपये में 40 रुपये सीधे भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे थे।
जब लोगों ने घटिया सर्फ-साबुन लेने से मना किया, तो विभाग ने एक नई योजना बनाई। इस बार मसाले की किट तैयार कराई गई, जिसमें धनिया, मिर्च, हल्दी और अन्य मसाले रखे गए कीमत वही 100 रुपये और कमीशन का बंटवारा भी पहले जैसा ही हैं।
सूत्र बताते हैं कि सिर्फ साबुन की बिक्री से ही विभाग के अफसरों और उनके करीबी एआरओ ने करीब 30 लाख रुपये की रकम वसूली। इसमें से आधी रकम यानी लगभग 15 लाख रुपये सीधे एआरओ ने बटोरे, जो पहले भी फिरोजाबाद और मुरादाबाद जिलों में तैनात रह चुका है और जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के कई पुराने मामले लंबित हैं। बताया जा रहा है कि इन एआरओ पर पहले से ही विजिलेंस जांच जारी है, लेकिन जिला पूर्ति अधिकारी ने फिर भी उन्हें अपनी टीम में बनाए रखा है। इन्ही एआरओ पर पूर्वी, पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्र का जिम्मा है।
और तो और, अवैध वसूली की जिम्मेदारी अब विभाग ने तीन खास कोटेदारों को सौंप रखी है। एक जिले के पूर्वी, दूसरा पश्चिमी और तीसरा उत्तरी क्षेत्र से रुपये की वसूली करता है। ये तीनों अपने-अपने इलाकों से कोटेदारों से धन उगाही कर सीधे जिला पूर्ति कार्यालय तक रकम पहुंचाते हैं। इन तीनों पर भी पहले कई गंभीर आरोप लग चुके हैं, बावजूद इसके इन्हें अफसरों का संरक्षण प्राप्त है।
अब सवाल यह उठता है कि जब विजिलेंस जांच जारी है, भ्रष्टाचार के आरोपों की गूंज शासन तक पहुंच चुकी है, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या बरेली में शासनादेश अब भ्रष्टाचार का लाइसेंस बन गया है?
आम जनता और कोटेदारों के बीच भारी रोष है। लोग पूछ रहे हैं क्या सरकारी योजना गरीब की मदद के लिए थी, या अफसरों की जेब भरने के लिए?

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