नई बसों में पुराने पुर्जे, सैकड़ों बसों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों का भुगतान-टेंडर दो बार रद्द, दागी फर्में लगातार सक्रिय
बरेली। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बरेली परिक्षेत्र में बसों की मरम्मत को लेकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। नई बसों में भी पुराने और कबाड़ पुर्जे लगाकर उन्हें मरम्मतशुदा बताया गया, जबकि कागजों में करोड़ों रुपये मूल्य के नए स्पेयर पार्ट्स, टायर, इंजन ऑयल और बैटरी दिखाकर भुगतान कर दिया गया। मई 2025 से दिसंबर के पहले सप्ताह तक लगभग 500 बसों की मरम्मत के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितताएं होने का आरोप है।
डिपो और क्षेत्रीय कार्यशाला में प्रशिक्षित मैकेनिकों की कमी बनी हुई है। इसके बावजूद मरम्मत का काम उन्हीं फर्मों को दिया जाता रहा, जिन्हें पूर्व में घोटालों में आरोपित पाते हुए निलंबित और काली सूची में डाला गया था। बसों के लगातार रास्ते में खराब होने और यात्रियों की सुरक्षा जोखिम में पड़ने के बावजूद, परिक्षेत्र स्तर पर अनियमितताओं को अनदेखा किया जाता रहा। मामला अंततः परिवहन मंत्री और रोडवेज मुख्यालय के संज्ञान में आने पर विभागीय हलकों में हलचल मची है।
अगस्त 2023 में भी क्षेत्रीय कार्यशाला में बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ था। उस समय मरम्मत से जुड़े अनियमितताओं की जांच के बाद साईं इंटरप्राइजेज को काली सूची में डाल दिया गया था, जबकि कमल इंटरप्राइजेज और भसीन इंटरप्राइजेज का निलंबन किया गया था। इसी प्रकरण में क्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय में तैनात सनी अरोरा तथा सेवा प्रबंधक कार्यालय के सहायक ललित अग्रवाल को भी निलंबित किया गया था। इन कार्रवाइयों के बाद उम्मीद थी कि भविष्य में मरम्मत व्यवस्था में सुधार होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
मई 2025 में दोबारा अनियमितताओं का बड़ा मामला उजागर हुआ। दुर्घटनाग्रस्त बसों की मरम्मत के नाम पर भारी-भरकम बिल तैयार कराकर भुगतान कर दिया गया, जबकि अधिकांश बसों पर वास्तविक मरम्मत कार्य नगण्य या शून्य था। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद सेवा प्रबंधक धनजी राम तथा बदायूं डिपो के एआरएम अजय सिंह को निलंबित कर दिया गया। साथ ही बरेली डिपो के एआरएम संजीव श्रीवास्तव, रुहेलखंड डिपो के एआरएम अरुण वाजपेयी सहित चार फोरमैन और दो लेखा अधिकारियों को चार्जशीट दी गई। इस कार्रवाई के बाद ठेकों को निरस्त कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद परदे के पीछे वही फर्में मरम्मत कार्य में सक्रिय रहीं।
सूत्रों के अनुसार मई से दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह तक टेंडर प्रक्रिया को दो बार रद्द कर दिया गया। इस रद्दीकरण का कोई पारदर्शी कारण नहीं बताया गया, जबकि इसी अवधि में मरम्मत का काम लगातार दागी फर्मों के माध्यम से जारी रहा। भसीन इंटरप्राइजेज से मरम्मत और कमल इंटरप्राइजेज से पुर्जों की आपूर्ति कराई जाती रही। दोनों फर्मों को एक ही मालिक से जुड़ा बताया जा रहा है। इस दौरान 500 बसों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये के बिल जारी कर पास किए गए।बरेली डिपो के सीनियर फोरमैन नवाबुद्दीन, समय पाल समेत कई अन्य कर्मचारियों पर भी अनियमितताओं में सहयोग देने के आरोप हैं।
टेंडर प्रक्रिया को लेकर सामने आए सवालों और लगातार बढ़ते दबाव के बीच अंततः 5 दिसंबर को तीसरी बार नया टेंडर जारी किया गया है। इस टेंडर में बसों की मरम्मत के 225 प्रकार के कार्यों को शामिल किया गया है तथा निजी फर्मों और आउटसोर्सिंग एजेंसियों से कुशल और प्रशिक्षित मैकेनिक उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। टेंडर की अंतिम तिथि 20 दिसंबर तय की गई है। मामला मंत्री स्तर पर पहुंचने के बाद परिक्षेत्र के कई अधिकारी खुद को आरोपों से बचाने में जुटे हुए हैं।
सेवा प्रबंधक मोहम्मद अजीम का कहना है कि बसों की मरम्मत क्षेत्रीय समिति की संस्तुतियों पर कराई जा रही है। मई 2025 के बाद टेंडर केवल एक बार निरस्त किया गया है और अब नई प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पूर्व की अनियमितताओं में कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, बरेली परिक्षेत्र के नोडल अधिकारी एवं जीएम तकनीकी आरबीएल शर्मा ने बताया कि मरम्मत और भुगतान से संबंधित शिकायतें मिली हैं और इस पर क्षेत्रीय प्रबंधक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। दोषियों के खिलाफ जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बरेली परिक्षेत्र में बसों की मरम्मत से जुड़ी अनियमितताएं लगातार सामने आती रही हैं। पिछले दो वर्षों में कई अधिकारी निलंबित हुए, कई फर्मों पर कार्रवाई हुई, लेकिन इसके बावजूद फर्जीवाड़े की कहानी थमने का नाम नहीं ले रही। अब तीसरी टेंडर प्रक्रिया के बाद यह देखना होगा कि क्या वास्तव में सुधार होगा या फिर मरम्मत के नाम पर चल रहा यह खेल एक बार फिर नए रूप में सामने आएगा।

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