UPSRTC: रोडवेज बस मरम्मत में बड़ा घोटाला, बिना टेंडर दोषी फर्म को करोड़ों का भुगतान, मुख्यालय ने मांगी रिपोर्ट
बरेली में नियमों को दरकिनार कर बिना टेंडर दोषी फर्म से कराया गया काम, 500 से ज्यादा बसों में गड़बड़ी उजागर
बरेली। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में बसों की मरम्मत को लेकर बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। लगातार मिल रही शिकायतों और सामने आए तथ्यों के बाद निगम मुख्यालय ने पूरे प्रकरण की गहन जांच के आदेश देते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है। वहीं स्थानीय स्तर पर भी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और बीते छह महीनों में कराई गई मरम्मत से संबंधित सभी फाइलों, बिलों और भुगतान विवरणों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
सेवा प्रबंधक मोहम्मद अजीम ने सीनियर फोरमैनों के साथ बैठक कर बसों की मरम्मत, खरीदे गए पुर्जों और किए गए भुगतानों का पूरा लेखा-जोखा एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि पिछले छह माह में कितनी बसों की मरम्मत कराई गई, किस मद में कितना खर्च दिखाया गया और कुल कितनी राशि का भुगतान किया गया।
बताया जा रहा है कि इससे पहले मई माह में रोडवेज बसों की मरम्मत में घोटाले का मामला उजागर होने पर तत्कालीन सेवा प्रबंधक धनजीराम सहित कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था। साथ ही जिस निजी फर्म पर अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे थे, उस फर्म से किसी भी प्रकार का काम लेने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बावजूद नियमों और निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए पर्दे के पीछे बिना टेंडर प्रक्रिया पूरी किए उसी दोषी फर्म से पुर्जों की खरीद और बसों की मरम्मत कराई जाती रही।
प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इस दौरान करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। अब तक 500 से अधिक बसों की मरम्मत में अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है। जांच में यह भी उजागर हुआ है कि जिन एसी बसों में कमानी (स्प्रिंग) की व्यवस्था ही नहीं होती, उनमें भी कमानी की मरम्मत दर्शाकर फर्जी बिल पास किए गए।
इतना ही नहीं, कई नई बसों के इंजनों में पुराने मोबिल ऑयल और पुराने पुर्जे लगाए गए, जबकि रिकॉर्ड में नए पुर्जों की आपूर्ति दिखाकर भुगतान उठा लिया गया। इस गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार का सीधा असर बसों की स्थिति पर पड़ा है। कई बसें समय से पहले ही खराब हो गईं, जिससे निगम को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला सामने आने और तूल पकड़ने के बाद अधिकारियों ने 5 दिसंबर को नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। साथ ही निगम मुख्यालय स्तर पर निगरानी और सख्त कर दी गई है। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों और संबंधित फर्म के खिलाफ कठोर कार्रवाई किए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

एक टिप्पणी भेजें