Bareilly: वर्कशॉप से निकलते ही जनरथ बस ब्रेकडाउन, बड़ा हादसा टला
बरेली। बरेली डिपो की जनरथ बस संख्या यूपी 32 एनएन 0947 रविवार को वर्कशॉप से चेक होकर बाहर निकलते ही ब्रेकडाउन हो गई। जानकारी के अनुसार बस के स्टेयरिंग का पाइप लीक हो गया, जिससे तेल बहने लगा और स्टेयरिंग जाम हो गई। स्टेयरिंग जाम होते ही बस सड़क पर ही रुक गई। गनीमत यह रही कि उस समय बस में कोई सवारी मौजूद नहीं थी। यदि हाईवे पर तेज रफ्तार में यह खराबी आती, तो बस अनियंत्रित होकर बड़े हादसे का शिकार हो सकती थी।
बताया गया कि रविवार को करीब सुबह 11 बजे बस बरेली डिपो की वर्कशॉप से चेक होकर अपने गंतव्य के लिए रवाना हुई थी, लेकिन कुछ ही दूरी पर खराब हो गई। इस संबंध में बरेली डिपो के सीनियर फोरमैन नवाबुद्दीन ने बताया कि बस पूरी तरह चेक कराकर बाहर भेजी गई थी, बाद में उसमें रबर का एक पाइप फट गया। उन्होंने इसे सामान्य घटना बताते हुए कहा कि ऐसे पाइप फटते रहते हैं और यह कोई बड़ी बात नहीं है।
घटना के बाद बस की ट्रिप कैंसिल कर दी गई और उसकी जगह दूसरी बस को रवाना किया गया। खराब बस को मैकेनिको ने वही आकर सही करने का प्रयास किया जिसमें लगभग शाम के पाँच बज गए। उसके बाद दोबारा बस को वर्कशॉप में ले जाया गया।
हालांकि, इस घटना ने डिपो में हो रही मरम्मत व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मरम्मत के नाम पर केवल खाना-पूर्ति की जा रही है और दोषी फर्में फर्जी बिल बनाकर निगम को चूना लगा रही हैं, जबकि कुछ अधिकारियों का उन्हें संरक्षण भी प्राप्त है।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में कुशल और प्रशिक्षित श्रमिकों की भारी कमी एक बड़ा कारण है। यही वजह है कि रोडवेज की बसें बार-बार रास्ते में ब्रेकडाउन हो रही हैं। अप्रशिक्षित मैकेनिकों से मरम्मत कराकर रोडवेज बसों की हालत लगातार खराब की जा रही है। इसके प्रमाण खुद आंकड़े दे रहे हैं। बीते दिनों रोडवेज के एक सीनियर फोरमैन ने भी यह स्वीकार किया था कि वर्कशॉप में प्रशिक्षित मैकेनिकों का अभाव है।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक माह में परिक्षेत्र की करीब 20 बसें ब्रेकडाउन हुई हैं, जबकि आधा दर्जन से अधिक बसें दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं। हाल ही में एक ऑनलाइन बुक एसी बस तीन घंटे की देरी से चल सकी, वहीं प्रयागराज जा रही एक बस आधी रात को जंगल में इंजन खराब होने के कारण खड़ी हो गई। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और रोडवेज को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
बड़ी संख्या में बसों के ब्रेकडाउन होने से यह साफ हो रहा है कि मरम्मत कार्य सही ढंग से नहीं किया जा रहा। रोडवेज के बेड़े में अब अधिकतर बीएस-6 श्रेणी की नई बसें शामिल हैं, लेकिन इसके उलट वर्कशॉप में इन्हें संभालने के लिए प्रशिक्षित मैकेनिक उपलब्ध नहीं हैं। इसी कारण नई बसों की भी ठीक से मरम्मत नहीं हो पा रही, जिसे लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं।
हाल ही में जब डीजल खपत अधिक होने के आरोप में चालकों के वेतन से कटौती की गई, तो कई चालकों ने क्षेत्रीय प्रबंधक से शिकायत करते हुए सीनियर फोरमैन नवाबुद्दीन पर नई बसों में पुराना मोबिल ऑयल डालने का आरोप लगाया था। चालकों का कहना है कि इसी वजह से नई बसों का प्रदर्शन प्रभावित हो रहा है।
सूत्रों का आरोप है कि परिवहन निगम (रोडवेज) के बरेली परिक्षेत्र में नई बसों में पुराने पुर्जे लगाकर उनका दम निकाला जा रहा है। बीते छह माह से सैकड़ों बसों की मरम्मत में खेल किया गया है और लगातार दोषी फर्मों से ही काम लिया जाता रहा। डिपो की वर्कशॉप से लेकर क्षेत्रीय कार्यशाला तक में प्रशिक्षित मैकेनिकों का अभाव है, नतीजतन बसें बीच रास्ते में जवाब दे रही हैं।
इस पूरे मामले में पक्ष जानने के लिए सेवा प्रबंधक मोहम्मद अजीम से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।

एक टिप्पणी भेजें