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Bareilly: बुलडोजर और फर्जी मुकदमों के बीच खानदान-ए-आला हज़रत को बदनाम करने की साजिश- मोहसिन हसन

Bareilly: बुलडोजर और फर्जी मुकदमों के बीच खानदान-ए-आला हज़रत को बदनाम करने की साजिश- मोहसिन हसन


बरेली। गुरुवार को एसएसपी कार्यालय के बाहर एक युवक द्वारा जहर खाकर आत्महत्या की कोशिश किए जाने के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। शुक्रवार को युवक के पिता मुकद्दर ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर अपने बेटे और बहु पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रार्थनापत्र दिया था। इसी बीच युवक की बेटी की तहरीर पर इज्जतनगर पुलिस ने मौलाना तौकीर रज़ा और मन्नान रज़ा खां उर्फ मन्नानी मियां के दामाद मोहसिन रज़ा खां सहित 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी।

एफआईआर दर्ज होने के बाद रविवार को मन्नानी मियां के दामाद मोहसिन रज़ा खां ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इस दौरान सबसे अहम बात यह सामने आई कि खुद युवक के पिता मुकद्दर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि इस पूरे मामले में मोहसिन रज़ा खां का कोई लेना-देना नहीं है और यह उनका पारिवारिक विवाद है, जिसमें बेवजह लोगों को फंसाया जा रहा है।

प्रेस बयान में आरोप लगाया गया कि एक सुनियोजित साजिश के तहत खानदान-ए-आला हज़रत और मसलक-ए-आला हज़रत को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है। हर मामले को जबरन 26 सितंबर 2025 की घटना से जोड़कर मौलाना तौकीर रज़ा खां का नाम घसीटा जा रहा है, जबकि उनका इस विवाद से कोई संबंध नहीं है।

बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि सिविल न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद बीडीए द्वारा बुलडोजर कार्रवाई की कोशिश की गई, जो न्यायालय की अवमानना है। साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के 31 मई 2025 के आदेश के तहत निर्धारित धनराशि जमा होने के बावजूद बिजली विभाग द्वारा रिकवरी की धमकियां दी जा रही हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक कथित गिरोह पर भी आरोप लगाए गए, जिसमें हिस्ट्रीशीटर नासिर सिद्दीकी और अन्य लोगों के शामिल होने की बात कही गई। आरोप है कि शाकिर बेग ने अपने पारिवारिक भूमि विवाद के चलते एसएसपी कार्यालय में जहर खाने का नाटक किया और बाद में उसकी बेटी के जरिए झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया।

बयान में कहा गया कि घटना के समय मोहसिन हसन खां अपनी दुकान पर मौजूद थे, जिसके सीसीटीवी फुटेज और गवाह मौजूद हैं। इसके बावजूद उन्हें और मौलाना तौकीर रज़ा खां को मामले में घसीटने की कोशिश की गई। प्रेस बयान में दो टूक कहा गया कि यह पूरा मामला पारिवारिक विवाद का है और खानदान-ए-आला हज़रत का इससे कोई संबंध नहीं है

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