सांसद नीरज मौर्य ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर सदन में व्यक्त की चिंता, किसानों, युवाओं और मूलभूत सुविधाओं पर उठाए गंभीर सवाल
बरेली। वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सदन में बोलते हुए आंवला के सांसद नीरज मौर्य ने माननीय अध्यक्ष महोदय को धन्यवाद दिया और बंकिम दा को नमन किया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय गीत 150 वर्षों से देश के कोने-कोने में लोगों के हृदय में वास कर रहा है। सांसद मौर्य ने वंदे मातरम में वर्णित सुजल भूमि, सुफल भूमि, मलय पर्वत की ठंडी हवाओं और लहलहा फसलों से ढकी जननी की कल्पना का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वही अन्नदाता किसान ऋण के बोझ से दबकर परेशान है। किसानों की आत्महत्या की घटनाएं मन को आहत करती हैं। उन्होंने कहा कि जिन पहाड़ों की कल्पना गीत में की गई है, आज वे तरह-तरह की त्रासदियों और प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं, इसलिए सरकार को चाहिए कि ऐसे हादसों से देश को बचाने के लिए एक ठोस रोड मैप तैयार करे।
उन्होंने चिंता जताई कि आज देश के करीब 70 प्रतिशत लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है, जबकि प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई हर घर जल–हर घर नल योजना में भ्रष्टाचार की दीमक लग चुकी है। इस पर सदन में गंभीर चर्चा कराकर योजना को ज़मीन पर सही रूप में लागू किया जाना आवश्यक है, ताकि लोगों को वास्तव में स्वच्छ जल मिल सके।
अपने संबोधन में सांसद नीरज मौर्य ने यह भी कहा कि आज नौजवानों को रोजगार नहीं मिल रहा, नई पीढ़ी शिक्षा और चिकित्सा से वंचित है, और लोगों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 2047 तक विकसित भारत बनाने की बात कही जाती है, तब स्थिति यह है कि पिछले 11 वर्षों में न एक विकसित गाँव बन पाया है और न ही एक स्मार्ट सिटी तैयार हो सकी है।
सांसद ने कहा कि इसलिए वंदे मातरम पर चर्चा के साथ-साथ इन बुनियादी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना समय की मांग है।

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