UPSRTC: आईटीआई संविदा कर्मियों से शपथ पत्र, हरिराम को बचाने की चाल या युवाओं के भविष्य से खिलवाड़?
बरेली। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की आईटीआई डिप्लोमा धारकों की संविदा भर्ती घोटाले में एक नया खुलासा हुआ है। आरोप है कि अब अधिकारियों द्वारा एसएस हरिराम को बचाने के लिए संविदा कर्मियों पर दबाव बनाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि आईटीआई संविदा कर्मियों को दोबारा नौकरी देने का लालच देकर उनसे शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं, ताकि उनके द्वारा लगाए गए पैसे वसूली के आरोप धूल सके।
संविदा कर्मियों ने सोमवार को सेवा प्रबंधन कार्यालय में बुलाए जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि उनसे कहा गया कि यदि वे शपथ पत्र देकर लिख दें कि हरिराम ने किसी से कोई वसूली नहीं की है, तो उन्हें फिर से नौकरी पर रख लिया जाएगा। इस पर कुछ संविदा कर्मियों ने स्पष्ट कहा कि यदि उनसे शपथ पत्र लिया जाएगा तो उन्हें लिखित आश्वासन भी दिया जाए कि उन्हें कब से नौकरी दी जाएगी।
गौरतलब है कि इस पूरे मामले को जागेश्वर न्यूज़ ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद मामला तूल पकड़ते हुए अखबारों की सुर्खियां बन गया।
वहीं जब इस मामले में हरिराम से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि समिति के हस्ताक्षर करवा कर इनकी नौकरी फिर से देने की तैयारी की जा रही है। लेकिन जैसे ही उनसे यह सवाल किया गया कि क्या वास्तव में संविदा कर्मियों से शपथ पत्र लिए जा रहे हैं, तो उनकी आवाज़ अचानक बंद हो गई। इसके बाद दोबारा संपर्क साधने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला।
अब देखना यह होगा कि इस पूरे प्रकरण में विभाग क्या रुख अपनाता है और संविदा कर्मियों को न्याय कब तक मिल पाता है।
आपको बता दें कि भ्रष्टाचार के आरोपों में सेवा प्रबंधक धनजीराम को निलंबित किया गया था। उनके कार्यकाल में आईटीआई डिप्लोमा धारकों को बाकायदा नियुक्ति पत्र मिले। लेकिन निलंबन के बाद रोहिलखंड डिपो के एआरएम अरुण कुमार बाजपेई ने बिना कारण बताए युवाओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया।
जाँच में खुलासा, कार्रवाई नहीं
नोडल अधिकारी सत्यनारायण की जाँच रिपोर्ट में रोडवेज बसों में मरम्मत के नाम पर किए गए घोटाले में सेवा प्रबंधक धनजी राम, बरेली डिपो के एआरएम संजीव श्रीवास्तव, रुहेलखंड डिपो के एआरएम अरुण वाजपेयी और पीलीभीत डिपो के एआरएम पावन श्रीवास्तव समेत 13 लोग दोषी पाए गए थे। इनमें लेखाकार और फोरमैन भी शामिल हैं, लेकिन अब तक धनजी राम को ही निलंबित किया गया है।
कार्रवाई के नाम पर सिर्फ चार्जशीट दी गई। दोषी अब भी अपनी कुर्सियों पर जमे हुए हैं और निगम को चूना लगाने वाली फर्में आज भी कार्यशालओं में काम कर रही हैं।

एक टिप्पणी भेजें