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क्यों हटाए गए आईटीआई डिप्लोमा धारक? कोई अधिकारी जवाब देने को तैयार नहीं: हरिराम

क्यों हटाए गए आईटीआई डिप्लोमा धारक? कोई अधिकारी जवाब देने को तैयार नहीं: हरिराम


भर्ती प्रक्रिया पर सवाल, वसूली और भ्रष्टाचार के आरोप, हरिराम बोले-"मेरे खिलाफ आरोप बेबुनियाद"

बरेली। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम में भर्ती प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। आईटीआई डिप्लोमा धारकों को नौकरी से अचानक हटाने के मामले में अब तक कोई अधिकारी खुलकर जवाब देने को तैयार नहीं है।

भ्रष्टाचार के आरोप में सेवा प्रबंधक धनजीराम को निलंबित किया गया था। उनके कार्यकाल में आईटीआई डिप्लोमा धारकों को बाकायदा नियुक्ति पत्र जारी किए गए थे। लेकिन उनके निलंबन के बाद रोहिलखंड डिपो के एआरएम अरुण कुमार बाजपेई ने इन नियुक्त कर्मचारियों को बिना कारण बताए बाहर कर दिया।

हरिराम बोले—वैध प्रक्रिया से हुई थी नियुक्ति

जागेश्वर न्यूज़ से बातचीत में एसएस हरिराम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी अब यह नहीं बता रहा की इनको बाहर क्यो निकाला।

मेरे खिलाफ लगाए जा रहे भ्रष्टाचार के आरोप बेबुनियाद हैं। नियुक्तियां कमेटी की सिफारिश पर वैध प्रक्रिया से हुईं। सवाल ये है कि फिर अचानक इन युवाओं को क्यों निकाला गया?” — एसएस हरिराम

जांच में कई अधिकारी दोषी, फिर भी कार्रवाई नहीं

नोडल अधिकारी सत्यनारायण की जांच में करीब एक दर्जन अधिकारी दोषी पाए गए। रोहिलखंड डिपो के एआरएम अरुण कुमार बाजपेई पर भी भ्रष्टाचार में शामिल होने के आरोप साबित हुए। बावजूद इसके, किसी पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ चार्जशीट देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

राजस्व को भारी नुकसान, दोषी अब भी कुर्सी पर

रिपोर्ट के अनुसार, निगम को राजस्व की भारी क्षति पहुंचाई गई। दोषी फर्में अब भी बरेली, रोहिलखंड और पीलीभीत डिपो में काम कर रही हैं। वहीं, आरोपित अधिकारी अपनी सीटों पर जमे हुए हैं और मलाई काट रहे हैं।

धनजीराम के बाद भी नहीं रुका भ्रष्टाचार

धनजीराम के निलंबन के बाद मोहम्मद अजीम को सेवा प्रबंधक का चार्ज मिला। लोगों को उम्मीद थी कि भ्रष्टाचार रुकेगा, मगर वे भी उसी ढर्रे पर चल निकले। उन्होंने भी भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

जांच में दोषी, फिर भी कार्रवाई नहीं

नोडल अधिकारी सत्यनारायण की जांच में दोषी पाए जाने के बाद सेवा प्रबंधक धनजीराम को निलंबित किया गया। लेकिन उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर पूरे मामले से वाकिफ होने के बावजूद बाकी दोषी अधिकारियों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाए।

जांच में जिन फर्मों और अधिकारियों पर गड़बड़ी के आरोप साबित हुए, उन पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। निगम को हुए राजस्व नुकसान के बावजूद नियमानुसार मुकदमा दर्ज करने के बजाय सिर्फ चार्जशीट देकर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

नतीजा यह हुआ कि दोषी फर्में आज भी रोहिलखंड, बरेली और पीलीभीत डिपो में काम कर रही हैं और आरोपित अधिकारी अपनी कुर्सियों पर जमे हुए मलाई काट रहे हैं।


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