UPSRTC: मुंशी ने खोले ठेकेदारों के भ्रष्टाचार के राज, चिट्ठी वायरल
बरेली। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की कार्यशाला में हुए भ्रष्टाचार के राज अब दोषी फर्म के मुंशी की वायरल चिट्ठी के साथ तेजी से खुल रहे है।
ममता इंटरप्राइजेज के मुंशी विपिन कुमार का एक पत्र इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल पत्र में लिखा है कि ममता इंटरप्राइजेज ने 11 माह के बिलों में बसों की मरम्मत के नाम पर डेढ़ करोड़ रुपए का घोटाला किया है। उन्होंने पत्र में यह भी लिखा है कि अलग-अलग जॉब कार्य उन बसों में किया गया, जिन बसों में काम नहीं होना था। मनमाने ढंग से बिल बनाकर फर्मों को भुगतान होता रहा।हालांकि जागेश्वर न्यूज़ वायरल चिट्ठी की सत्यता की पुष्टि नहीं करता हैं। वायरल चिट्ठी में मुंशी विपिन कुमार का आरोप है कि जब इस पूरे मामले की सूचना मुख्यमंत्री के सचिव संजय प्रसाद को हुई तो उन्होंने पूर्व प्रकरण की जांच कराई। जांच के दौरान सेवा प्रबंधक ने कुंभ जाने वाली बसों के मेंटेनेंस में अनदेखी का हवाला देते हुए टेंडर निरस्त कर दिया।
वायरल चिट्टी में मुंशी विपिन कुमार ने जनहित में मुख्यमंत्री से अपील की है उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम में हुए करोड़ों के घोटाले की निष्पक्ष जांच कर कर दोषी फर्मों और अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए जो कि प्रदेश में एक मिशाल साबित हो।
आपको बता दें कि तत्कालीन नोडल अधिकारी सत्यनारायण ने अपनी जांच में स्पष्ट लिखा था कि ममता एंटरप्राइजेज और भसीन एंटरप्राइजेज द्वारा माह फरवरी 2024 के बिलों में फर्जीवाड़ा किया है। उनके फ़र्ज़ीवाडे में बरेली, रुहेलखंड और पीलीभीत डिपो के सीनियर फोरमैन भी सम्मिलित है जो की जांच में दोषी पाए गए हैं।
सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक संजीव श्रीवास्तव बरेली डिपो, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अरुण कुमार बाजपेई रुहेलखंड डिपो, सहायक क्षेत्रीय अधिकारी पवन कुमार श्रीवास्तव पीलीभीत डिपो, सीनियर फोरमैन दीपक कुमार जैन, दिनेश सिंह, जुबेर अहमद व लेखाकार ओमपाल सिंह, राजेश जायसवाल और मेवाराम गंगवार सत्यापन करने के लिए दोषी पाए गए हैं।
भुगतान के लिए सहायक लेखा अधिकारी और सेवा प्रबंधक को दोषी पाया गया था। उन्होंने अपनी जांच में यह भी स्पष्ट किया था कि बाहरी फ़र्मों के द्वारा किए जा रहे कार्य के भुगतान में हो रही अनियमितताओं के बारे में जानकर भी रोकथाम की कार्रवाई नहीं करने के मामले में भी दोषी पाए गए हैं।
उन्होंने जांच के दौरान यह भी स्पष्ट किया था कि इसके आगे के माह में भी अनियमिताएं मिलने की संभावना है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि फरवरी 2024 से वर्तमान तक के संबंधित समस्त अभिलेखों की विशेष जांच कराई जाना अत्यंत आवश्यक है। इसके बाद भ्रष्टाचार के आरोप में सेवा प्रबंधक धनजीराम को निलंबित कर दिया गया।
लेकिन बाकी दोषी अधिकारी व कर्मचारी और दोषी फार्मो पर अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई।
जब मुंशी ने नहीं किया भ्रष्टाचार में सहयोग तो दिखाया बाहर का रास्ता, कार्रवाई से बचने को फिर दी नौकरी
जानकारी के अनुसार जब मुंशी विपिन कुमार ने ममता इंटरप्राइजेज और भसीन इंटरप्राइजेज के काले कारनामों को जग जाहिर किया तो ममता इंटरप्राइजेज के मालिक अशोक कुमार ने उसको बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद मुंशी विपिन कुमार ने तमाम साक्ष्य अधिकारियों को उपलब्ध ताकि उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम में पहले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा सके। ऐसा न होने पर उन्होंने मीडिया को दोनों दोषी फ़र्मों के तमाम दस्तावेज सौंपे। जनहित में अधिकारियों को भी पत्र लिखकर पूरे भ्रष्टाचार से अवगत कराया। इसके बाद फर्मों के टेंडर निरस्त हुए। भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और दोषी फ़र्मो को भुगतान कराने के मामले में सेवा प्रबंधक धनजीराम पर कार्रवाई हुई। जब ठेकेदार को लगा कि अब उस पर भी गाज गिर सकती है तो उसने विपिन कुमार को फिर से अपने यहां काम पर रख लिए, इसके बाद मुंशी ने देखा कि यहां भ्रष्टाचार अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है तो उसने एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मुंशी के पास फर्मो के भ्रष्टाचार के कई हजार दस्तावेज है। जो उसने उच्च अधिकारियों को भेजे है।
आखिर एमडी मौन क्यों ?
भ्रष्टाचार के आरोप में सेवा प्रबंधक धनजीराम के निलंबन के बाद उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के एमडी मौन धारण कर चुके हैं। उन्होंने अभी तक जांच में दोषी पाए गए बाकी कर्मचारी और अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। वहीं जांच में ममता इंटरप्राइजेज और भसीन इंटरप्राइजेज भी दोषी पाई गई थी उनके खिलाफ भी एमडी ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। दोनों फर्मों लगातार कार्यशालाओं में अपने पैर जमाए हुए है। दोषी फर्में अभी भी उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की कार्यशाला में फर्जीवाड़ा कर जमकर मलाई काट रही। दोषी फ़र्मो को अभी तक लगातार भुगतान किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो इसके पीछे विभाग के कुछ अधिकारियों का संरक्षण है। जिसके बदले उन अधिकारियों को इन फर्म स्वामियों द्वारा सुविधा शुल्क पहुंचाया जाता है।
थाने में खड़ी बस का बिल सीनियर फोरमैन ने किया था सत्यापित
मुंशी विपिन कुमार ने आरोप लगाते हुए बताया कि थाने में खड़ी बस का बिल सीनियर फोरमैन नवाबुद्दीन ने सत्यापित किया था। जबकि नोडल अधिकारी की जाँच रिपोर्ट में उनका नाम नहीं है। जबकि वह इस मामले में मुख्य आरोपी है।


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