Bareilly: इस्तीफे के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने लगाया डीएम आवास में 45 मिनट तक बंधक रखने का आरोप
बरेली। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के बाद जिला प्रशासन में दिनभर हलचल मची रही। सोमवार को सुबह से देर रात तक उन्हें मनाने का प्रयास चलता रहा। अधिकारियों ने पहले उनके करियर का हवाला देकर समझाने की कोशिश की, फिर भावनात्मक अपील भी की गई, लेकिन सभी प्रयास असफल रहे।
शाम को सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री जिलाधिकारी आवास पहुंचे, जहां वे लगभग एक घंटे तक मौजूद रहे। डीएम आवास से बाहर निकलने के बाद उन्होंने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। अलंकार अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जिलाधिकारी ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया था, लेकिन वहां उन्हें करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उन्होंने सचिव दीपक पांडेय को फोन कर जानकारी दी कि उन्हें बंधक बनाया गया है। उनका कहना है कि जैसे ही यह बात वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची, उन्हें तुरंत वहां से जाने दिया गया। सिटी मजिस्ट्रेट ने यह भी आरोप लगाया कि एक षड्यंत्र के तहत उन्हें रातभर डीएम आवास में रोकने की योजना बनाई गई थी।
अलंकार अग्निहोत्री ने यह भी दावा किया कि डीएम आवास पर मौजूद रहते हुए लखनऊ से एक वरिष्ठ अधिकारी का फोन आया था। उन्होंने बताया कि डीएम अविनाश सिंह उस अधिकारी से स्पीकर फोन पर बातचीत कर रहे थे, इसी दौरान दूसरी ओर से उन्हें अपशब्द कहे गए।
इस्तीफे के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने अपना सरकारी आवास खाली करने के लिए समर्थकों को बुला लिया है। उनके बंगले पर समर्थकों का पहुंचना जारी है।
इधर, अखंड भारत गौरव ट्रस्ट के संस्थापक अनिल मुनि भी सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे की खबर मिलते ही उनके आवास पर पहुंचे। उन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए मीडिया के सामने कपड़े उतारकर विरोध प्रदर्शन किया। अर्धनग्न अवस्था में उन्होंने कहा कि “आज स्वर्ण समाज के कपड़े उतर गए हैं।” साथ ही उन्होंने यूजीसी बिल को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि संसद में अन्य कानूनों पर हंगामा होता है, लेकिन इस बिल पर किसी ने आवाज नहीं उठाई।
वहीं, पूरे मामले पर बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने सिटी मजिस्ट्रेट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि अलंकार अग्निहोत्री को बंधक बनाए जाने की बात पूरी तरह गलत और भ्रामक है। डीएम के अनुसार, पीसीएस अधिकारियों की मौजूदगी में सामान्य बातचीत के दौरान चाय पीते हुए उनसे इस्तीफे के कारणों को समझने का प्रयास किया गया था। इसके अलावा कोई असामान्य या दबाव वाली स्थिति नहीं थी।

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