UPSRTC: दोषी फर्म पर मेहरबान अफसर, फिर ठेका देने की तैयारी
जांच में दोषी पाई गई भसीन एंटरप्राइजेज को संरक्षण, भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का आरोप
बरेली। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका बड़ा उदाहरण बरेली परिक्षेत्र में सामने आया है। यहां जांच में दोषी पाई गई निजी फर्म भसीन एंटरप्राइजेज और ममता एंटरप्राइजेज पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि इन्हें दोबारा ठेका देने की तैयारी चल रही है। इससे निगम के अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मामला बरेली और रोहिलखंड डिपो से जुड़ा है, जहां बसों की मरम्मत किए बिना फर्जी बिल बनाकर लाखों रुपये का भुगतान करा लिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि जिन बसों में कोई काम नहीं हुआ, यहां तक कि जो बसें थाने में खड़ी थीं, उनके भी मरम्मत के बिल बनाकर निगम से धनराशि निकाल ली गई।
जांच में दोषी, फिर भी कार्रवाई शून्य
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रमुख सचिव और परिवहन मंत्री के निर्देश पर तत्कालीन नोडल अधिकारी सत्यनारायण से जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में भसीन एंटरप्राइजेज, ममता एंटरप्राइजेज सहित परिवहन निगम के 13 अधिकारी और कर्मचारी दोषी पाए गए। इनमें सीनियर फोरमैन, एआरएम और सेवा प्रबंधक स्तर के अधिकारी शामिल थे।
लेकिन हैरानी की बात यह रही कि दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय नोडल अधिकारी सत्यनारायण को ही आनन-फानन में बरेली क्षेत्र से हटा दिया गया और उनकी जगह आरबी लाल शर्मा को नया नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिया गया। इससे जांच को कमजोर करने और मामले को ठंडे बस्ते में डालने के आरोप लगने लगे।
एक निलंबन, बाकी सब सुरक्षित
जब मामला स्थानीय अखबारों की सुर्खियों में आया, तब तत्कालीन प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर ने भ्रष्टाचार के आरोप में सेवा प्रबंधक धनजीराम को निलंबित कर दिया। लेकिन अन्य आरोपी अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई से बचते रहे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में दोषी पाई गई दोनों फर्मों को आज तक ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया।
दोषी फर्मों को लगातार भुगतान
सूत्रों के अनुसार, भसीन एंटरप्राइजेज और ममता एंटरप्राइजेज आज भी बरेली और रोहिलखंड डिपो में कार्यरत हैं और उन्हें लगातार भुगतान किया जा रहा है। इससे निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
नए अधिकारियों से भी नहीं जगी उम्मीद
बरेली में नए सेवा प्रबंधक मोहम्मद अजीम की तैनाती के बाद उम्मीद जगी थी कि दोषियों पर कार्रवाई होगी, लेकिन आरोप है कि उन्होंने क्षेत्रीय प्रबंधक दीपक चौधरी के साथ मिलकर दोषी फर्मों को संरक्षण देना जारी रखा और उच्चाधिकारियों को वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया।
प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर के तबादले के बाद प्रभु नारायण सिंह को चार्ज मिलने पर भी कार्रवाई की उम्मीद बनी, लेकिन लंबा समय बीतने के बावजूद न तो दोषी अधिकारियों पर गाज गिरी और न ही दोषी फर्मों को निगम से बाहर का रास्ता दिखाया गया।
फिर ठेका देने की तैयारी
अब विभागीय सूत्रों का दावा है कि जांच में दोषी पाई गई भसीन एंटरप्राइजेज को एक बार फिर बरेली और रोहिलखंड डिपो में ठेका देने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, बरेली से लेकर लखनऊ मुख्यालय तक फर्म की मजबूत पकड़ है। आरोप है कि हर महीने मोटी रकम अधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है, जिसके चलते कार्रवाई पर ब्रेक लगा हुआ है।
सवालों के घेरे में निगम
जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद न ब्लैकलिस्टिंग, न वसूली और न ही व्यापक विभागीय कार्रवाई—यह स्थिति साफ संकेत देती है कि परिवहन निगम में भ्रष्टाचार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि इसकी जड़ें मुख्यालय तक फैली हुई हैं।
अब सवाल यह है कि क्या दोषी फर्मों को फिर से ठेका देकर ईमानदार व्यवस्था की उम्मीद की जा सकती है? या फिर यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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