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Bareilly: Bedi International school में छात्र के भविष्य से खिलवाड़, बाल संरक्षण आयोग ने सीबीएसई बोर्ड से तलब की रिपोर्ट

Bareilly: Bedi International school में छात्र के भविष्य से खिलवाड़, बाल संरक्षण आयोग ने सीबीएसई बोर्ड से तलब की रिपोर्ट


बरेली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से संबद्ध वेदी इंटरनेशनल स्कूल, पीलीभीत बाइपास रोड के एक इंटरमीडिएट छात्र के परीक्षा परिणाम को लेकर बड़ा प्रशासनिक विरोधाभास सामने आया है। सरकारी यू-डाइस पोर्टल और सीबीएसई द्वारा जारी आधिकारिक मार्कशीट में अलग-अलग परिणाम दर्ज होने के कारण छात्र को किसी भी विद्यालय में प्रवेश नहीं मिल सका, जिससे उसका पूरा शैक्षणिक सत्र बर्बाद हो गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने संज्ञान लेते हुए सीबीएसई बोर्ड को तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं। आयोग ने इस पूरे प्रकरण को बाल अधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में मानते हुए 20 दिनों के भीतर जांच आख्या तलब की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार देव गुप्ता ने सत्र 2025-26 में इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा दी थी, जिसमें पहले उसे कम्पार्टमेंट मिला। इसके बाद आयोजित कम्पार्टमेंट परीक्षा में छात्र को अनुत्तीर्ण घोषित किया गया। इसके बावजूद जब 30 अक्टूबर 2025 को छात्र के पिता सौरभ गुप्ता अपने बेटे का दाखिला दूसरे विद्यालय में कराने पहुंचे, तो उत्तर प्रदेश सरकार के यू-डाइस पोर्टल पर छात्र का परिणाम ‘पास’ प्रदर्शित हो रहा था, जबकि सीबीएसई की आधिकारिक मार्कशीट में छात्र को फेल बताया गया।

सरकारी पोर्टल और बोर्ड रिकॉर्ड में इस गंभीर विरोधाभास के चलते किसी भी विद्यालय ने छात्र को प्रवेश नहीं दिया। परिणामस्वरूप छात्र न तो आगे की पढ़ाई कर सका और न ही वैकल्पिक शैक्षणिक व्यवस्था का लाभ ले पाया। सौरभ गुप्ता का आरोप है कि यह पूरी तरह सिस्टम की लापरवाही और आपसी समन्वय की कमी का नतीजा है, जिसकी कीमत एक मासूम छात्र को चुकानी पड़ी।

आयोग ने सीबीएसई से इस मामले की तत्काल और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि जांच के दौरान सभी संबंधित दस्तावेज संलग्न करते हुए की गई कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट बीस दिन में प्रस्तुत की जाए।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी प्रशासनिक विसंगतियों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो इससे न केवल छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा बल्कि सरकारी डिजिटल शिक्षा प्रणालियों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होंगे।

अब सबकी निगाहें सीबीएसई बोर्ड की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि यह गंभीर चूक किस स्तर पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

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