- चिलचिलाती धूप और लू ने आम लोगों को तिलमिलाने पर किया मजबूर, लोग अपने घरों में कैद
सूरज की तपिश के कारण झुलसने लगा शरीर, गायब हुआ जगह जगह मिलने वाला मटके का ठण्डा पानी
- चिलचिलाती धूप और लू ने आम लोगों को तिलमिलाने पर किया मजबूर,
लोग अपने घरों में कैदबरेली। सूरज की बढ़ती जा रही तपिश से और तेज लू ने लोगों का सड़क पर चलना बेहाल कर रखा है। हर दिन गर्मी अपना एक नया रिकॉर्ड बनाती जा रही है। दोपहर होते होते लोग चिल चिलाती धूप में गर्म हवाओं और तपिश से तिलमिलाने लगे है। शरीर को झुलसाने वाली धूप से बचने के लिए लोग सुबह दस बजे और शाम को अपना काम निपटाने की कोशिश में लगे हुए है।
लेकिन दो जून की रोटी का इंतजाम करने वाले गरीब गुर्गों को तो बाहर निकलना ही होता है, क्योंकि अगर वो सुबह शाम का इंतजार करेंगे तो शाम को उनके घर का चूल्हा ही नही जलेगा। अप्रैल महीने की तेज धूप ने अभी से ही लोगों को मई और जून की गर्मी का एहसास दिलाने लगी है। शासन स्तर से भी स्कूली बच्चों का समय परिवर्तन कर दिया गया है। लेकिन वह भी एक बजे जब स्कूल से छुटते हैं तो वह भी तिलमिला उठते हैं।हर दिन तेज धूप और बढ़ते पारे के चलते आम लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। चिलचिलाती धूप में लोगों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। इस समय दिन का तापमान चालीस डिग्री से अधिक हो चला है और इसके और अधिक बढने की संभावना जताई जा रही है जिससे आने वाले दिनों में लोगों को और अधिक गर्मी झेलनी पड़ सकती है। गर्मी की तपिश के चलते लोगों की दिनचर्या में भी बदलाव होने लगा है सुबह और शाम को आम लोग अपना जरूरी काम निपटाने की चाहत रखते नजर आ रहे है। दोपहर में सडक़ और मुख्य मार्गों में सन्नाटा पसरा रहता है। वहीं मौसम विभाग ने एलर्ट जारी किया है कि आने वाले दिनों में लू और गर्मी बढने की पूरी आशंका है। इसका सीधा असर मानव जीवन पर दिखाई देगा। घर और प्रतिष्ठानों में एसी, कूलर, पंखे ही भीषण गर्मी से बचाव का सहारा बने हुए है। वही आम तौर पर राहगीरों के लिए पहले जगह जगह ठंडे पानी की व्यवस्था की जाती थी लेकिन इस बार ऐसा होता कहीं नही दिखाई दे रहा। ठंडा पानी पिलाने वाले मिट्टी के मटके अब लुप्त होते जा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि फ्रिज, वॉटर कूलर और आरओ का चलन इतना बढ़ गया है कि लोग इन मटकों के पानी को भूल ही चुके हैं। ऐसे में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हार जाति के लोगों के लिए अब रोजी-रोटी का संकट मंडराने लगा है। शहर में बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों के आगे आपको वाटर कूलर को रखेंगे जाएंगे लेकिन मिट्टी के मटके कहीं नहीं दिखाई देंगे। दरअसल आज के इस फैशन के जमाने को देखते हुए कारीगर नई तकनीक और रंग-रोपन करके मिट्टी के मटके और अन्य मिटटी के बर्तन बना रहे है। साथ ही ज्यादा लागत में कम मुनाफा कमाने की भी कोशिश कर रहे है। जिससे उनका पुस्तैनी पेशा खत्म न हो सकें। बावजूद इसके आम लोग इन मिट्टी के मटकों का प्रयोग लगभग बंद कर चुके हैं। आपको बता दें कि इस तपिश भरी गर्मी में ठंडा पानी पीने के लिए फ्रिज और वॉटर कूलर का चलन बढ़ने से शहर में मिट्टी के मटके बनाने का काम अब लगभग न के समान ही रह गया है। आम लोग ज्यादातर फ्रिज और वॉटर कूलर से ही पानी पीना पसंद कर रहे हैं। जिसके कारण अब शहर में मिटटी के मटके ढूढ़ने से भी नही मिलते। फिलहाल गर्मी की तपिश अभी लोगों को और झेलनी होगी।
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