चुनावी दौर में मौलाना तौकीर ने मांगा नोड्यूज, चुनाव लड़ने की संभावना
चुनावी दौर में मौलाना तौकीर ने मांगा नोड्यूज, चुनाव लड़ने की संभावना
बरेली। 2010 दंगों के मुख्य आरोपी और इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां बरेली के चुनावी मैदान में भाग्य आजमा सकते हैं। उच्चतम न्यायालय से निचली अदालतों के आदेशों पर रोक से मिली राहत के बाद मौलाना सियासी राह पर आगे बढ़ने की तैयारी में हैं। गुपचुप तरीके से नामांकन की तैयारी के लिए उनकी ओर से नगर निगम में प्रार्थना पत्र के साथ शपथ पत्र देकर नो-ड्यूज सर्टिफिकेट मांगा है।
आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर दूसरी बार चुनाव में उतरने की तैयारी में हैं। उनकी ओर से इस बात के संकेत दिए जा रहे हैं। उनके करीबियों की मानें तो वे 19 अप्रैल को नामांकन दाखिल कर सकते हैं। दरअसल, मौलाना और सियासत का नाता बेहद पुराना है। करीब दो दशक पहले बदायूं लोकसभा सीट से मौलाना सियासत में पटखनी खा चुके हैं। उनके पिता रेहान रजा खां ने मुस्लिम समुदाय के मामलों को उठाने के लिए आईएमसी का गठन किया था। वर्ष 2000 में आईएमसी की कमान मौलाना को मिली। इसके बाद उन्होंने सपा को समर्थन दिया। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को आईएमसी का समर्थन मिला था और बरेली से प्रवीण सिंह ऐरन सांसद बने थे। वहीं पिछले विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को आईएमसी ने दोबारा समर्थन दिया था।
आईएमसी का सियासी सफर भी उठा-पठक वाला रहा है। वर्ष 2012 में भोजीपुरा विधानसभा सीट से शहजिल इस्लाम पार्टी के पहले विधायक बने। मगर, छह माह बाद ही उन्होंने सपा की सदस्यता ले ली।
मौलाना तौकीर रजा विवादों से भी हर समय घिरे रहे हैं। एडीजे फास्ट ट्रैक की अदालत ने बीते दिनों मौलाना को वर्ष 2010 के बरेली दंगे का मास्टर माइंड माना था और उनकी गिरफ्तारी तक के आदेश दिए हैं। इसके अलावा जिला जज की अदालत ने इसी मामले में कुर्की का आदेश दिया है। हालांकि अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई तक स्थगन आदेश जारी किया है।
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