UPSRTC: धुलाई ठेकेदार की मनमानी, चालक ने वीडियो वायरल कर उठाई आवाज़, देखें वीडियो
बरेली। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम की बसों की धुलाई और साफ-सफाई की लापरवाही एक बार फिर सुर्खियों में है। रुहेलखंड डिपो के एक चालक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें धुलाई ठेकेदार और स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
वीडियो में चालक ने खुलासा किया कि बस संख्या यूपी 78 केटी 4245 रात 1 बजे डिपो पर आई थी, लेकिन सुबह तक उसकी धुलाई नहीं हुई। अगले चालक की ड्यूटी शुरू होने पर भी गाड़ी उसी हालत में खड़ी रही। चालक ने सवाल उठाया— “क्या चालक गाड़ी चलाए या पहले धुलवाए? नियम है कि बिना धुलाई के गाड़ी मार्ग पर नहीं जाएगी, लेकिन यहां आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।”
चालक ने यह भी आरोप लगाया कि धुलाई लाइन से बसों को हटाकर साइड में खड़ा कर दिया जाता है और स्टाफ अक्सर ड्यूटी के समय सोता रहता है। उन्होंने साफ कहा कि यह सीधे-सीधे चालकों का उत्पीड़न है और किसी अधिकारी-कर्मचारी को उनकी परेशानियों की परवाह नहीं। वायरल वीडियो कुछ ही समय पहले का बताया जा रहा है।
ठेकेदार पर पुराने आरोप भी दोहराए
जानकारी के अनुसार, रुहेलखंड डिपो में धुलाई का ठेका ममता इंटरप्राइजेज के पास है। यह वही फर्म है जो पहले भी फर्जीवाड़े में पकड़ी जा चुकी है। इसी फ़र्म के द्वारा थाने में खड़ी बस का फर्जी मरम्मत का बिल बनाकर भुगतान ले लिया गया था। जांच में दोषी साबित होने के बावजूद फर्म पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। जिसके चलते ममता इंटरप्राइज़ेज अभी उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की कार्यशालाओं में पैर जमाए हुए है।
अब वायरल हुए इस वीडियो से साफ है कि ठेकेदार पर शिकंजा कसने के बजाय अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। चालक ने वीडियो में कहा कि कई बसें बिना धुलाई खड़ी हैं और सवाल उठाया कि “यदि धुलाई ठेकेदार अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे तो इसमें चालकों की गलती कहां है?”
अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
रुहेलखंड डिपो में धुलाई और सफाई की लापरवाही कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस बार चालकों ने सोशल मीडिया का सहारा लेकर अपनी पीड़ा उजागर की है। वायरल वीडियो ने निगम की कार्यप्रणाली और ठेकेदार की मनमानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल, उच्च अधिकारियों से अपील की जा रही है कि ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें और बस चालकों को इस उत्पीड़न से निजात दिलाएं।
वायरल वीडियो उच्च अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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