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परिवहन निगम में भर्ती घोटाला: आईटीआई डिप्लोमा धारकों से वसूले पैसे, कुछ दिन बाद दिखाया बाहर का रास्ता

परिवहन निगम में भर्ती घोटाला: आईटीआई डिप्लोमा धारकों से वसूले पैसे, कुछ दिन बाद दिखाया बाहर का रास्ता


बरेली। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की कार्यशालाओं में भर्ती घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। रुहेलखंड, बरेली और पीलीभीत डिपो की कार्यशालाओं में आईटीआई डिप्लोमा धारकों को नौकरी देने के नाम पर दस-दस हजार रुपये वसूले गए। युवाओं को बाकायदा नियुक्ति पत्र जारी कर कुछ दिन काम भी कराया गया, लेकिन अचानक बिना किसी सूचना या नोटिस के बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। अब पीड़ित युवा सेवा प्रबंधक कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, जबकि उनसे पैसे वसूलने वाला एसएस हरिराम लगातार उन्हें झूठा आश्वासन दे रहा है।

भ्रष्टाचार के साये में भर्ती प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, निलंबित सेवा प्रबंधक धनजीराम के कार्यकाल में एसएस हरिराम ने करीब 11 युवाओं से 10-10 हजार रुपये वसूले। नियुक्ति पत्र पर धनजीराम के हस्ताक्षर थे और युवाओं ने कुछ दिन तक ड्यूटी भी की। लेकिन जैसे ही सेवा प्रबंधक धनजीराम भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित हुए, वैसे ही इन 11 युवाओं को बरेली, रुहेलखंड और पीलीभीत कार्यशालाओं से बिना किसी आदेश या कारण बताए निकाल दिया गया।

फर्जीवाड़े से टूटे सपने

बेरोजगारी से जूझ रहे आईटीआई डिप्लोमा धारकों ने नौकरी के लिए कर्ज लेकर पैसा दिया था। अब न तो नौकरी है और न ही रकम वापस मिल रही है। पीड़ित युवाओं का कहना है—“हमें भरोसा दिलाया गया था कि यह स्थायी नौकरी होगी। अब हमारी मेहनत की कमाई और समय दोनों बर्बाद हो गए।”

रिटायरमेंट से पहले दबाने की कोशिश

सेवा प्रबंधक कार्यालय में तैनात एसएस हरिराम कुछ ही दिनों में रिटायर होने वाले हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा और अवैध वसूली की रकम हड़प ली जाएगी।

पहले भी उजागर हो चुके हैं घोटाले

यह पहला मौका नहीं है जब परिवहन निगम की कार्यशालाओं में भ्रष्टाचार की गूंज उठी हो। पहले भी नियुक्तियों और मरम्मत कार्यों में गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन कार्रवाई न होने से ऐसे अधिकारी बेखौफ होकर मनमानी करते हैं।

अब सवाल यह है कि परिवहन निगम और उच्च अधिकारी इस भर्ती घोटाले में दोषियों पर कब तक कार्रवाई करेंगे? क्या बेरोजगार युवाओं की मेहनत की कमाई उन्हें वापस मिलेगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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